रुड़की:- हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) में नक्शा पास कराने और निर्माण संबंधी फाइलों के निस्तारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सामान्य प्रक्रिया के तहत काम कराने में लंबा समय लग जाता है, जबकि कथित तौर पर “सेटिंग” होने पर फाइलें तेजी से आगे बढ़ती दिखाई देती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दुकान या मकान के निर्माण के लिए नक्शा पास कराने की प्रक्रिया आम नागरिक के लिए आसान नहीं रह गई है। कई लोगों को अपनी फाइल की स्थिति जानने और संबंधित कार्य पूरा कराने के लिए बार-बार एचआरडीए कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। आरोप है कि छोटी-छोटी कमियों या आपत्तियों के कारण फाइलें लंबे समय तक एक टेबल से दूसरी टेबल तक घूमती रहती हैं। सबसे ज्यादा सवाल कथित तौर पर कुछ कथित आर्किटेक्ट और बिचौलियों की भूमिका को लेकर उठ रहे हैं। आरोप है कि आम लोगों को एचआरडीए के नियम-कायदों और कार्रवाई का डर दिखाकर कथित आर्किटेक्ट उनसे मोटी रकम वसूली जाती है। लोगों का कहना है कि कई आवेदक सीधे विभागीय प्रक्रिया को समझने के बजाय आर्किटेक्ट या कथित दलालों पर निर्भर हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि कुछ आर्किटेक्ट विभागीय प्रक्रिया में अपनी पकड़ होने का दावा करते हुए लोगों से अतिरिक्त रकम लेते हैं। उनका कहना है कि यदि विभागीय अधिकारी निर्धारित समयसीमा में फाइलों का पारदर्शी तरीके से निस्तारण करें और आवेदकों को ऑनलाइन अथवा स्पष्ट प्रक्रिया के माध्यम से जानकारी उपलब्ध कराई जाए तो बिचौलियों की भूमिका स्वतः कम हो सकती है। मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि फाइलों के निस्तारण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध है, तो लोगों को बार-बार कार्यालय के चक्कर क्यों लगाने पड़ते हैं? वहीं, यदि कहीं अवैध वसूली या भ्रष्टाचार हो रहा है तो उसकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई कौन करेगा? इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और विभागीय स्तर पर पारदर्शी व्यवस्था की मांग उठ रही है। एचआरडीए अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेग
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