रुड़की। “तारीख पे तारीख, तारीख पे तारीख…” फिल्मी दुनिया का यह चर्चित संवाद इन दिनों हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाले लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि प्राधिकरण के समक्ष शिकायतें पहुंचने के बावजूद कई मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ पाती और शिकायतकर्ताओं को बार-बार अगली तारीख का इंतजार करना पड़ता है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि आम आदमी यदि अपने मकान या निर्माण से संबंधित किसी मामले में प्राधिकरण के सामने आता है तो उसे नियम-कायदों और प्रक्रिया के कई चरणों से गुजरना पड़ता है। वहीं, कुछ रसूखदार लोगों की संपत्तियों और कथित अवैध निर्माणों से जुड़े मामलों में कार्रवाई की गति को लेकर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। रुड़की शहर में नजूल भूमि और विभिन्न ट्रस्टों की जमीन से जुड़े मामलों को लेकर भी समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। आरोप लगाए जाते हैं कि कुछ स्थानों पर भूमि पर कब्जा कर निर्माण किए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का यह भी आरोप है कि प्रभावशाली लोगों से कथित नजदीकी के चलते कुछ मामलों में कार्रवाई अपेक्षित गति से नहीं होती। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना भी जरूरी है। मामला तब और गंभीर हो जाता है जब किसी फरियादी द्वारा प्राधिकरण के अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर जांच और कार्रवाई की मांग की जाती है। शिकायतकर्ता उम्मीद करता है कि मौके का निरीक्षण होगा, दस्तावेजों की जांच होगी और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। लेकिन यदि प्रक्रिया लंबे समय तक लंबित रहे तो फरियादी के मन में स्वाभाविक रूप से सवाल उठने लगते हैं। रुड़की में ऐसे कई मामलों को लेकर चर्चा है, जिनमें शिकायतें प्राधिकरण के संज्ञान में आने के बाद भी कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। अब इन मामलों के उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद लोगों की निगाहें HRDA की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या लंबित मामलों में अब तेजी से जांच कर नियमानुसार कार्रवाई होगी या फिर शिकायतकर्ताओं को एक बार फिर “तारीख पे तारीख” का इंतजार करना पड़ेगा? इसका जवाब आने वाला समय ही बताएगा।
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