रुड़की:- आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों में टिकट की दावेदारी का दौर तेज होता दिखाई दे रहा है। खासकर भाजपा में अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से टिकट की दौड़ में शामिल कुछ नेताओं ने अपनी सक्रियता बढ़ाते हुए रक्षाबंधन से पहले विभिन्न क्षेत्रों में रक्षाबंधन समारोह आयोजित करने शुरू कर दिए हैं। इन आयोजनों में क्षेत्र की महिलाओं की भागीदारी पर खास जोर दिया जा रहा है और कहीं रक्षा सूत्र बांधने की प्रतियोगिता तो कहीं अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से भीड़ जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में इन कार्यक्रमों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आमतौर पर चुनावी माहौल से पहले नेताओं की ओर से होली मिलन, दीपावली मिलन और ईद मिलन जैसे सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं। अब इसी कड़ी में रक्षाबंधन मिलन समारोह भी राजनीतिक सक्रियता और जनसंपर्क का नया माध्यम बनते नजर आ रहे हैं। टिकट की दौड़ में शामिल नेताओं द्वारा अपनी-अपनी विधानसभा के अलग-अलग क्षेत्रों में इस तरह के आयोजन किए जाने को लेकर समर्थकों और राजनीतिक जानकारों के बीच अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं।
इन कार्यक्रमों के जरिए जहां महिला मतदाताओं से सीधा संपर्क साधने की कोशिश नजर आ रही है, वहीं आयोजकों की ओर से अधिक से अधिक लोगों की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए भी अलग-अलग तरीके अपनाए जा रहे हैं। कार्यक्रमों के मंच से सामाजिक सरोकार और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की बात की जा रही है, लेकिन राजनीतिक नजरिए से देखा जाए तो इन आयोजनों को टिकट की दावेदारी मजबूत करने की कवायद के तौर पर भी देखा जा रहा है। वहीं टिकट की दौड़ में शामिल कुछ नेता प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के पार्टी नेताओं से नजदीकी बढ़ाने की कोशिश में भी जुटे हैं। बड़े नेताओं की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों के जरिए अपनी राजनीतिक सक्रियता और जनाधार दिखाने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में रक्षाबंधन समारोह महज सामाजिक आयोजन हैं या आगामी चुनाव की तैयारियों का हिस्सा, यह चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सवाल यह है कि क्या इस तरह के आयोजनों से भाजपा के टिकट की दावेदारी वास्तव में मजबूत होगी? क्या भीड़ जुटाने, महिला मतदाताओं से संपर्क और बड़े नेताओं तक अपनी पहुंच बनाने की रणनीति टिकट की दौड़ में किसी नेता को बढ़त दिला पाएगी? या फिर रक्षाबंधन जैसे पवित्र पर्व को राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखने की चर्चाएं ही इन आयोजनों की सबसे बड़ी पहचान बनेंगी? इसका जवाब आने वाले समय में पार्टी नेतृत्व के टिकट वितरण के दौरान ही सामने आएगा।
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